स्थलाकृति

(1) सिवनी जिले की भौगोलिक संरचना  

स्थिति एवं विस्तार मध्यप्रदेश के दक्षिणी भाग में सतपुड़ा – मैकल श्रेणी पर स्थित सिवनी जिला विकास कार्यो  हेतु एक प्रशासनिक इकाई है | जिले का विस्तार 21°-37’ से 22°-57’ उत्तरी  अक्षांश तथा 79°-19’ से 80°-17’ पूर्वी देशांतर के मध्य है | उत्तर पूर्व  में मंडला जिला , उत्तर में जबलपुर जिला , उत्तर- पश्चिम में नरसिंहपुर जिला , पश्चिम में छिंदवाडा जिला , दक्षिण पूर्व में बालाघाट जिला एवं दक्षिण में महाराष्ट्र प्रदेश के नागपुर जिले सिवनी  जिले की सीमा बनाते है |सिवनी जिले का कुल  क्षेत्रफल 8758 वर्ग किलो मीटर है ।

स्थिति मानचित्र जिला – सिवनी

भू गर्भिक संरचना – भौमिकी ,भूस्वरुप का निर्धारक तत्त्व होता है | क्षेत्र का विकास भौमिकी एवं भूस्वरुप पर आधारित होता है | प्रदेश में आद्य , प्री –कैम्ब्रियन , दक्कन ट्रैप एवं लमेटा संस्तर की शैले पाई जाती है| इन शैलो का जमाव भूगर्भ में क्षैतीजिक मिलता है |

जिले के दक्षिण के छोटे भाग आद्य युगीन चट्टानों का विस्तार मिलता है | इससे उत्तर की और लगभग एक तिहाई भाग में प्री कैम्ब्रियन क्रम की शैलो का विस्तार मिलता है |

सिवनी जिले के उत्तरी एवं मध्यवर्ती लगभग दो तिहाई भाग में दक्कन ट्रैप का क्षेत्र है |इस क्षेत्र में दक्कन ट्रैप की शैलो की मोटाई अधिक है  | जिले के उत्तर पश्चिम भाग में शैलो की मोटाई कम होती  जाती है जो सीमा पर मनौरी पहाड़ी के रूप में सतह पर दिखाई पड़ती है |दक्कन ट्रैप के क्षेत्र में बाक्साइड संग्रह एवं प्राचीन चट्टानें लावा के रूप में पाई जाती है |

लमेटा संस्तरो का सर्वाधिक विस्तार जिले के मध्यवर्ती भाग में है | इस क्षेत्र में बलुआ पत्थर एवं चूना  पत्थर की शैले है |

भू वैज्ञानिक संरचना मानचित्र जिला सिवनी

 उच्चावच – उच्चावच का प्रभाव प्रदेश  के विकास पर पड़ता है | तुलनात्मक  दृष्टि  से मैदानी एवं पठारी भाग अपेक्षाकृत अधिक विकसित होते है|जिले के अधिकांश भाग समुद्र सतह से 300  से 450  मीटर  ऊँचा है|प्रदेश के मैदानी एवं पठारी  भाग में कृषि अधिक विकसित एवं उन्नत है |फलस्वरूप  इन क्षेत्रो में जनसँख्या का घनत्व अधिक मिलता है | दक्षिण में वन भूमि है  ,जिससे यह भाग अपेक्षाकृत कम विकसित है  |इस प्रदेश की समुद्र सतह से ऊँचाई 838 मीटर (मनौरी पहाड़ ) है |

उच्चावच मानचित्र जिला सिवनी

अपवाह तंत्र यह प्रदेश  गोदावरी  बेसिन तथा नर्मदा बेसिन का भाग है |यह प्रदेश गोदावरी नदी की प्रमुख सहयक  नदी बैनगंगा का प्रवाह क्षेत्र है | बैनगंगा नदी इस प्रदेश  की मुख्य नदी है |हिर्री , बावनथडी , पेंच,बिजना अलोन कनेरा सेढ पचधार सुनेर टेमर और बघोरा सहायक  नदियाँ है |प्रदेश के मध्य भाग में बैनगंगा और सहायक नदियाँ , –ठेल ,बिजना , सागर , हिर्री ,अलोन आदि के साथ बहती है |जिले का उत्तरी भाग नर्मदा बेसिन का है

यहाँ कनेर सेढ ,सुनेर ,टेमर बघोरा आदि नदियाँ बहती है , जो आगे जाकर नर्मदा नदी में मिलती है |दक्षिण में बावनथड़ी तथा पचधार  आदि नदियाँ बहती  है  | बैनगंगा दक्षिण से उत्तर  दिशा को प्रवाहित होती हुई  छपारा के पास पूर्व की और मुद जाती है , तथा सिवनी और बलाघात जिलो की सीमा बनाते हुए यह  बालाघाट जिले प्रवेश कर जाती है | इस नदी पर छपारा  से  15  किलोमीटर दूर स्थित भीमगड गाँव में एक मिटटी का बांध बनाया गया है तहत इसके पानी  को सिवनी और बालाघाट जिलो के क्षेत्रो में सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है |बैनगंगा  नदी की कुल लम्बाई 208  किलोमीटर है |जिसमे सिवनी जिले में इसकी कुल लम्बाई 148  किलोमीटर है |

मुख्य नदियाँ  एवं उनका कैचमेंट क्षेत्र नदियाँ  कैचमेंट क्षेत्र

(वर्ग कि.मी.)

नदियों की लंबाई मुख्य नदियाँ  एवं उनका कैचमेंट क्षेत्र
गोदावरी तटीय क्षेत्र 6592.0 398 वैनगंगा, हिर्री, बावनथड़ी
नर्मदा तटीय क्षेत्र 2115.0 167 सोनेर, शेर, तेमूर

(2) सिवनी जिले की प्रशासनिक संरचना 

 

सिवनी नगर इस जिले का मुख्यालय है||इस जिले में 8 तहसीले (1) सिवनी,(2) बरघाट,(3) केवलारी,(4) लखनादौन,(5) धनौरा,(6) घंसौर,(7) छपारा , (8) कुरई है | संपूर्ण जिला 8 विकासखंडो (1) सिवनी,(2) बरघाट,(3) केवलारी,(4) लखनादौन,(5) धनौरा,(6) घंसौर,(7) छपारा , (8) कुरई में विभक्त है , जिनमे 5 विकासखंड (1) लखनादौन,(2) धनौरा,(3) घंसौर,(4) छपारा,(5) कुरई एवं 3 सामुदायिक विकासखंड (1) सिवनी,(2) बरघाट,(3) केवलारी है |

प्रशासनिक मानचित्र जिला सिवनी