जलवायु

सिवनी जिले की जलवायु

जलवायु प्रदेश की कृषि और विकासात्मक कार्यो को प्रभावित करने  वाला मुख्य कारक है | जलवायु कृषि को प्रभावित करने वाला भौतिक वातावरण का प्रमुख तत्त्व है | मानवीय चरित्र एवं जातीय गुण बहुत सीमा तक जलवायु पर निर्भर करते है | जिले की जलवायु पर प्राकृतिक रचना एवं समुद्र तट से दूरी  का विशेष प्रभाव पड़ा है | समुद्र से आने वाली पवनो के समकारी  प्रभाव से वंचित होने के कारण यहाँ की जलवायु सामान्यता स्थलीय एवं मानसून पवनों से प्रभावित है | वर्षा ऋतु में दैनिक तापान्तर कम एवं आर्द्रता  अधिक होती है | शीत ऋतु में  न्यूनाधिक वर्षा एवं सुखद ठंडा वातावरण होता है | ग्रीष्म ऋतु में भीषण गर्मी एवं जलवायु सम्बन्धी अनेक विविधताओ जैसे – मानसूनी प्रभाव एवं चक्रवर्ती प्रभाव जैसे विशेषता पाई जाती है | सिवनी जिले की जलवायु थार्नथ्वेट  के  अनुसार ‘सी. ए .डब्लू’ (उष्ण कटिबंधीय उष्ण शीत ऋतु शुष्क ) प्रकार की एवं कोपेन के अनुसार  ‘ए .डब्लू’( उष्ण कटिबंधीय आर्द्र एवं शुष्क जलवायु )प्रकार की है |

  ऋतुएं 

(क) शीत ऋतु मुख्यतः सितम्बर में सूर्य के दक्षिणायन होने के साथ  ही औसत तापमान का गिरना शीत  ऋतु के आगमन की सूचना देता है  | इस समय संपूर्ण क्षेत्र का तापमान 29.8 से 15.98 अंश सेल्सियस के मध्य  रहता है  | मैदानी भागो में जलवायु  तत्वों की प्रकृति – तापमान , वर्षा और आर्द्रता एक समान रहती है , इसके विपरीत पहाड़ी एवं पठारी भागो में असमानता विद्यमान रहती  है | अक्टूबर के पश्चात आकाश स्वच्छ होने के कारण  आर्द्रता गिरने लगती है  और जनवरी में तापक्रम कम हो जाता है |

                                                                इस ऋतु में मौसम सूखा, आकाश स्वच्छ तथा हवा की गति मंद होती है | रात्रि का तापमान गिरने से पहाड़ी और पठारी भागो में स्थानीय  रूप से पाला तथा कोहरा पड़ता है | अधिकतम दैनिक तापमान 28.4 अंश सेल्सियस से 26.1 अंश सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 8.42 अंश सेल्सियस से 6.54 अंश सेल्सियस के मध्य मिलता है | इस प्रदेश मे उत्तर से आने वाली शीत हवाओं के कारण जनवरी सबसे ठंडा महिना होता है , जब औसत मासिक तापमान  लगभग 19.00 अंश सेल्सियस होता है इस ऋतु मे लगभग 21. 67 मिलीमीटर वर्षा होती है यह वर्षा रबी फसलो के लिए आर्द्रता  को बनाये रखती है |( मानचित्र क्रमांक 1.4 )

 

(ख) ग्रीष्म ऋतु मुख्य रूप से मार्च के अंत तक सूर्य के कर्क रेखा की ओर अग्रसर होने के साथ –साथ जिले मे तापमान मे वृद्धि  होने लगती है जिससे वायु भार कम होकर 1010 -999 मिलिबार तक हो जाता है वायुभार  का ढाल दक्षिण से उत्तर की और होता है | हवाओं का प्रवाह  वायुभार के ढाल के अनुरूप हो जाता है | इस ऋतु में दैनिक औसत तापमान 33.2 अंश सेल्सियस से 39.7 सेल्सियस तक  पहुँच जाता है | आर्द्रता में कमी , आकाश की स्वच्छता एवं धूलयुक्त आंधियाँ आदि इस ऋतु की विशेषता है |

                                                                 सामान्यता यह ऋतु सूखी होती है | संपूर्ण प्रदेश में वनस्पतियों के पत्ते झड़ जाते है | अप्रैल से जून के मध्य क्षेत्र के मैदानी एवं पठारी भागो में तापमान अत्याधिक होता है जिससे वातावरण कष्टदायक हो जाता है | भूमि में जल का स्तर कम होने से विकासात्मक कार्यो  में  जल प्रबंध के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है  | वर्षा ऋतु के प्रारंभ  होने से पूर्व कृषि कार्यो की तैयारी , खनिज एवं वन संसाधनों का दोहन इसी काल में सम्पन्न किया जाता है | ( मानचित्र क्रमांक 1.4 )

(ग) वर्षा ऋतु प्रदेश में 15 से 20 जून के आसपास वर्षा ऋतु प्रारंभ  हो जाती है | इस ऋतु में जून से वायु की आर्द्रता बढ़ने लगती है | क्योंकि  सागरों के ऊपर से आने वाली पवने उत्तर- पश्चिम के न्यून वायुभार वाले केंद्र की और आकर्षित होने लगती है |ये पवने बैनगंगा तथा हिर्री के मैदानी भागो में प्रवेश करती है | जिससे निकटवर्ती पहाड़ी और पठारी भागो में वर्षा होती है | जून के बाद तापमान कम होने लगता हैं | दैनिक अधिकतम तापमान 25.8 अंश सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 16.94 अंश सेल्सियस हो जाता है |  ( मानचित्र क्रमांक 1.4 )

जलवायु मानचित्र जिला सिवनी